यूपी के महराजगंज पुलिस की कारनामा, हत्या का आरोप, जेल, और फिर जिंदा लौटी बेटी ! पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल
- By UP Samachaar Plus --
- Friday 20 Dec, 2024
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मुख्य संपादक - ओंकार नाथ वर्मा
घुघुली (महराजगंज) 20 दिसंबर। जनपद के घुघली थाना क्षेत्र के पोखरभिंडा गांव से जुड़ा एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने न केवल न्याय व्यवस्था बल्कि पुलिस की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस बेटी की हत्या के आरोप में पिता और पुत्र जेल गए थे, अब उसके जीवित होने का दावा किया जा रहा है। इस चौंकाने वाले मामले ने पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है।
क्या है पूरा मामला?
संजय दुसाध और उसके बेटे अम्बरीश उर्फ सूरज को उसकी बेटी प्रीति की हत्या के आरोप में जेल भेजा गया था। पुलिस ने दावा किया था कि प्रीति का शव निचलौल नहर से बरामद हुआ था और संजय, उसकी पत्नी और एक रिश्तेदार ने कपड़ों के आधार पर शव की पहचान की थी। शव का पुलिस द्वारा अंतिम संस्कार भी करा दिया गया था।
लेकिन संजय दुसाध का कहना है कि उसने बार-बार पुलिस से कहा कि वह शव उसकी बेटी प्रीति का नहीं है, लेकिन उसकी बात को अनसुना कर दिया गया। पुलिस ने हत्या के आरोप में संजय और उसके बेटे को जेल भेज दिया।
बिहार में मिली बेटी
उच्च न्यायालय से जमानत मिलने के बाद, संजय ने अपनी बेटी प्रीति की खोज जारी रखी। आखिरकार, उसे अपनी बेटी का पता बिहार के कैलाश नगर, बगहा (पश्चिम चंपारण) में चला। जब वह वहाँ पहुँचा, तो उसने बेटी प्रीति को जीवित पाया और उसे अपने साथ घर वापस लाया । अब संजय ने जिला एवं सत्र न्यायालय में आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाई है।
पुलिस की कार्रवाई पर सवाल
संजय का आरोप है कि पुलिस ने मामले की ठीक से जांच नहीं की। विवेचना के दौरान आरोपियों से पूछताछ नहीं की गई और बिना पर्याप्त सबूतों के हत्या का मामला दर्ज कर लिया गया। हत्या के आरोप में नामजद आरोपियों को छोड़कर पिता-पुत्र को जेल भेज दिया गया।
प्रीति के जीवित होने के दावे ने इस पूरे मामले को एक नया मोड़ दे दिया है। सवाल यह उठता है कि अगर प्रीति जीवित है, तो नहर से बरामद शव किसका था? पुलिस की जल्दबाजी और लापरवाही ने संजय और उनके परिवार को ना केवल सामाजिक बल्कि मानसिक यातना भी झेलने पर मजबूर किया।
न्यायालय की भूमिका
मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायालय ने जनवरी में सुनवाई की तिथि तय की है। इस प्रकरण ने पुलिस और प्रशासन की कार्यशैली पर एक बार फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस घटना ने क्षेत्र में कानून-व्यवस्था और पुलिस की निष्पक्षता पर बहस छेड़ दी है। पीड़ित परिवार न्याय की उम्मीद लगाए हुए है, जबकि स्थानीय लोग इस मामले की सच्चाई सामने आने का इंतजार कर रहे हैं।
इस तरह की घटनाएं न केवल पुलिस व्यवस्था में सुधार की मांग करती हैं, बल्कि जांच और न्याय प्रक्रिया में पारदर्शिता की भी आवश्यकता को रेखांकित करती हैं। सवाल यह है कि क्या दोषियों को सजा मिलेगी और क्या पीड़ित परिवार को न्याय मिलेगा? यह तो आने वाला समय ही बताएगा।

