निचलौल के मदरसा अरबिया अजीजिया मजहरूल उलूम में अनियमितताओं का आरोप
- By UP Samachaar Plus --
- Friday 23 Jan, 2026
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बायलॉज व नियमावली की अनदेखी कर प्रशासन को गुमराह करने का मामला, प्रबंध समिति विवाद गहराया
निचलौल (महराजगंज)। नगर क्षेत्र स्थित मदरसा अरबिया अजीजिया मजहरूल उलूम में प्रबंध समिति को लेकर चला आ रहा विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। वर्ष 2019–20 से शुरू हुआ यह विवाद अब कानूनी, प्रशासनिक और विभागीय स्तर पर गंभीर रूप ले चुका है। मदरसे के संविधान, बायलॉज और सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम की अनदेखी कर नियमविरुद्ध ढंग से समिति गठन और नियुक्तियों के आरोप लगाए गए हैं।
मामला तत्कालीन प्रबंधक महमूदुल्लाह और आबिद अली के बीच शुरू हुआ था। आरोप है कि आबिद अली ने मदरसे के बायलॉज का हवाला देते हुए यह दावा किया कि प्रत्येक तीन वर्ष में प्रबंध समिति का चुनाव अनिवार्य है। इसी आधार पर 7 अक्टूबर 2021 को चुनाव कराकर सहायक रजिस्ट्रार, चिट्स फंड एवं सोसाइटी, गोरखपुर में समिति की सूची पंजीकृत कराई गई। इस सूची को लेकर सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम की धारा 25(1) के अंतर्गत एसडीएम न्यायालय, निचलौल में वाद दायर हुआ।
24 अगस्त 2023 को एसडीएम निचलौल ने आबिद अली के चुनाव को वैध ठहराया। इसके बाद उन्होंने वर्ष 1979 के पुराने बायलॉज का हवाला देते हुए स्वयं को प्रबंधक और अपने पुत्र जमशेर को अध्यक्ष दर्शाते हुए 27 सितंबर 2023 को वर्ष 2024–25 के लिए 20 सदस्यीय प्रबंध समिति की सूची पंजीकृत करा दी।
जबकि मदरसे के बायलॉज के अनुसार कार्यकारिणी समिति में अधिकतम 15 सदस्यों का ही प्रावधान है। साथ ही एक सदर और दो नायब सदर होना अनिवार्य बताया गया है, लेकिन पंजीकृत कराई गई सूची में न तो सदस्यों की संख्या नियमों के अनुरूप है और न ही पदों की संरचना सही पाई गई।
इसी बीच महमूदुल्लाह ने एसडीएम के आदेश को चुनौती देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की, जिस पर 18 अक्टूबर 2023 को हाईकोर्ट ने एसडीएम के आदेश और पंजीकृत सूची पर स्थगन आदेश जारी कर दिया। यह स्थगन 30 मई 2024 तक प्रभावी रहा। ऐसे में अप्रैल 2024 में नई सूची दाखिल किए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
आरोप है कि इसके बाद प्रबंधक बने आबिद अली ने नियमों को दरकिनार कर ताबड़तोड़ नियुक्तियां कीं। 22 जून 2024 को की गई पांच नियुक्तियों को मदरसा नियमावली 2016 के विपरीत बताया जा रहा है। इन नियुक्तियों में रिश्तेदारी और धन उगाही के आरोप भी लगाए गए हैं। इसके अलावा फाउंडर कमेटी की सूची के विपरीत शिक्षक खालिद अली को नाजिम-ए-तालीमात नियुक्त किए जाने का भी आरोप है।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कार्यकारिणी समिति के पांच सदस्यों को बिना नोटिस और वैधानिक प्रक्रिया के हटा दिया गया। इस पर सहायक रजिस्ट्रार ने सभी पक्षों को आपत्ति सहित उपस्थित होने का निर्देश दिया, जिससे मामला और उलझ गया।
विवाद के बीच एक अन्य व्यक्ति द्वारा स्वयं को प्रबंधक बताते हुए अलग-अलग तिथियों में चुनाव कराने का दावा कर सूची पंजीकृत कराने का प्रयास किया गया, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई। अंततः सदस्य शौकत अली द्वारा एसडीएम न्यायालय में पुनः वाद दाखिल किया गया, जिस पर संस्था की मूल पत्रावली तलब की गई है।

