होली के दिन भी “कागज़ी फावड़ा”! मनरेगा में फर्जी हाज़िरी का गंभीर आरोप

महराजगंज। केंद्र सरकार भले ही महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना को पारदर्शी बताकर बड़े-बड़े दावे करती रहे, लेकिन महराजगंज जिले के पनियरा ब्लॉक से आई तस्वीरें इन दावों की पोल खोलती दिख रही हैं।

मामला पनियरा ब्लॉक के जंगल बड़हरा गांव का है, जहां 04 मार्च—होली के दिन मनरेगा में काम दिखाकर सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप सामने आया है। जब पूरा गांव रंग-गुलाल में डूबा था, तब रिकॉर्ड में फावड़े चल रहे थे।

आरोप है कि चौधरी के खेत से गिरगिटिया गांव के सिवान तक संपर्क मार्ग पर मिट्टी कार्य दर्शाते हुए 18 मजदूरों की हाज़िरी चढ़ा दी गई। वहीं रामरक्षा के घर से डिंगुरी सिवान तक संपर्क मार्ग पर 48 मजदूरों की उपस्थिति दर्ज दिखाई गई। सवाल सीधा है—होली जैसे प्रमुख पर्व पर क्या मनरेगा कार्य संभव है? या फिर यह सब कागज़ों पर चलाया गया खेल है?

यह भी सवाल उठता है कि क्या इस कथित कार्य की जानकारी बीडीओ और एपीओ को थी, या फिर सरकारी धन की निकासी के लिए फर्जी हाज़िरी दर्ज कर ली गई? विकसित भारत जी राम जी और ‘पारदर्शिता’ की बात, ज़मीनी सच्चाई से कोसों दूर नजर आती है।

इस संबंध में जब एपीओ पनियरा शिव प्रकाश सिंह से बात की गई तो उन्होंने साफ कहा,

“होली के दिन मनरेगा कार्य नहीं होता। यदि कहीं ऐसा दर्शाया गया है तो जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।”

अब देखने वाली बात यह है कि जांच सिर्फ कागज़ों तक सिमटेगी या जिम्मेदारों पर वास्तविक कार्रवाई होगी? क्योंकि अगर होली के दिन भी काम दिखाया जा सकता है, तो मनरेगा में पारदर्शिता के दावे खुद सवालों के घेरे में हैं।


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