गोवंश अस्थि प्रकरण में तीन सदस्यीय जांच समिति गठित, तीन दिन में देनी होगी रिपोर्ट
- By UP Samachaar Plus --
- Tuesday 17 Feb, 2026
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महराजगंज। सक्सेना चौक पर गोवंश की अस्थियां रखकर किए गए प्रदर्शन के मामले को जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा ने गंभीरता से लिया है। प्रकरण की निष्पक्ष जांच के लिए अपर जिलाधिकारी (वि/रा), अपर पुलिस अधीक्षक एवं मुख्य पशु चिकित्साधिकारी की तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई है। समिति को निर्देश दिया गया है कि तीन दिवस के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि जांच के बाद दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध कठोर विधिक कार्रवाई की जाएगी।
जिला विकास अधिकारी/प्रभारी खंड विकास अधिकारी सदर ने बताया कि गौआश्रय स्थल अहमदपुर हड़हवा में वर्तमान में कुल 123 गोवंश संरक्षित हैं। नगर पालिका परिषद महराजगंज के वाहन से सोमवार को दोपहर 12:30 बजे सात निराश्रित गोवंश यहां लाए गए थे, जिनमें एक बछड़े की हालत गंभीर थी। उपचार के दौरान अपराह्न 1:30 बजे बछड़े की मृत्यु हो गई। पशु चिकित्सकीय पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृत्यु का कारण पेट में अत्यधिक मात्रा में प्लास्टिक पाए जाने से उत्पन्न टिम्पेनाइटिस (पेट फूलना) बताया गया है।
बीडीओ सदर ने बताया कि सचिव द्वारा जानकारी दी गई है कि घटना के दौरान कुछ अराजक तत्वों ने गौशाला परिसर में प्रदर्शन किया और मृत गोवंश के शव को जबरन कब्जे में लेने का प्रयास किया। इसके बाद कथित रूप से सुनियोजित तरीके से प्रशासन की छवि धूमिल करने के उद्देश्य से अन्य स्थान से अस्थियां एकत्र कर उन्हें गौशाला से प्राप्त बताते हुए सड़क पर प्रदर्शन किया गया। इस संबंध में संबंधित सचिव द्वारा तहरीर दी जा रही है।
प्रभारी खंड विकास अधिकारी द्वारा दोनों गौआश्रय स्थलों का स्थलीय निरीक्षण भी किया गया। निरीक्षण में अहमदपुर हड़हवा गौआश्रय स्थल पर 50 कुंतल भूसा, 12 कुंतल चोकर, छह कुंतल पशु आहार, एक एकड़ बरसीम (हरा चारा), तीन कुंतल साइलेज तथा 3.5 कुंतल चूना पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध पाया गया। वहीं, गौआश्रय स्थल चेहरी में कुल 535 गोवंश संरक्षित हैं, जहां 880 किलोग्राम चोकर, 650 किलोग्राम पशु आहार, 100 किलोग्राम साइलेज और 3500 किलोग्राम भूसा उपलब्ध पाया गया।
जनपद प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि गोवंश की सुरक्षा और समुचित देखभाल के प्रति प्रशासन पूरी तरह प्रतिबद्ध है। किसी भी प्रकार की भ्रामक सूचना फैलाने या कानून-व्यवस्था प्रभावित करने के प्रयासों को गंभीरता से लिया जाएगा। जांच रिपोर्ट आने के बाद पूरे प्रकरण के तथ्य सार्वजनिक किए जाएंगे और दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।

