महराजगंज में मौत के बाद खुली पोल! बिना डॉक्टर चल रहा था नोवा हॉस्पिटल, ओटी सील, पंजीकरण रद्द की तैयारी
- By UP Samachaar Plus --
- Wednesday 18 Mar, 2026
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महराजगंज। सदर कोतवाली क्षेत्र में 16 मार्च को एक महिला की इलाज के दौरान मौत के बाद उठे बवाल ने अब स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और निजी अस्पतालों की हकीकत उजागर कर दी है। परिजनों के हंगामे और लापरवाही के आरोपों के बीच जब जांच हुई तो मऊपाकड़, धनेवा-धनेई स्थित नोवा हॉस्पिटल एंड डायबिटीज केयर में गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हुआ।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ नवनाथ प्रसाद के आदेश पर अपर मुख्य चिकित्साधिकारी वीरेंद्र आर्या की 17 मार्च को हुई जांच में चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई। जांच के दौरान अस्पताल संचालक आलोक कुमार पटेल उपस्थित मिले लेकिन अस्पताल में एक भी डॉक्टर मौजूद नहीं था, जबकि दो महिला मरीज भर्ती थीं। जिनमें एक निर्मला देवी निवासी शीतलापुर, निचलौल का पथरी का ऑपरेशन और दूसरी चांदनी देवी, पुरैना निवासी का सिजेरियन प्रसव कराया गया था। सवाल यह है कि आखिर बिना डॉक्टर के ऑपरेशन कैसे किए गए?
जांच में यह भी सामने आया कि नामित पैरामेडिकल स्टाफ गायब मिले और प्रशिक्षु एएनएम पूनम प्रजापति व एक अन्य स्टाफ सुधा गुप्ता के भरोसे मरीजों की जान जोखिम में डाली जा रही थी। मरीजों की बीएचटी अधूरी मिली, वहीं बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन और प्रदूषण प्रमाण पत्र की वैधता भी समाप्त पाई गई।
इतना ही नहीं, अस्पताल के निचले तल में बिना रजिस्टर्ड एक्स-रे मशीन संचालित हो रही थी, जो सीधे तौर पर नियमों की अनदेखी है। सबसे बड़ी लापरवाही ऑपरेशन थियेटर में मिली, जो पूरी तरह अव्यवस्थित था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल ओटी कक्ष को सील कर दिया।
उधर, जिस महिला की मौत के बाद बवाल मचा, उसके परिजनों का आरोप था कि उन्हें केएमसी मेडिकल कॉलेज ले जाते समय बहला-फुसलाकर निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया और ऑपरेशन के बाद महिला की जान चली गई। सूत्रों के अनुसार अस्पताल प्रबन्धन और परिजनों के बीच मामले को मैनेज का खेल भी जारी हैं।
स्वास्थ्य विभाग की मानें तो अब स्वास्थ्य विभाग अस्पताल का पंजीकरण निरस्त करने की तैयारी में है। अब देखना यह है कि क्या इस बार दोषियों पर सख्त कार्रवाई होती है या फिर हर बार की तरह सांठगांठ का खेल हावी रहेगा?

