अधिकारियों की माया कहीं धूप कहीं छाया- कहीं सचिव निलंबित हो रहे हैं, तो कहीं कार्रवाई न होने को लेकर उठ रहे सवाल !
- By UP Samachaar Plus --
- Tuesday 13 Oct, 2026
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महराजगंज/निचलौल। महराजगंज से वीबी-जी रामजी योजना में कथित अनियमितता का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सरकारी निगरानी व्यवस्था पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। कहीं बिना काम किए मजदूरों की ऑनलाइन हाजिरी दर्ज होने पर सचिव निलंबित हो रहे हैं, तो कहीं कार्रवाई न होने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
मामला निचलौल ब्लॉक की ग्राम पंचायत करमहिया और बढ़हरा चरगहां से जुड़ा है। बढ़हरा चरगहां में चार कार्यस्थलों पर बिना काम के 906 ऑनलाइन हाजिरी दर्ज मिलीं। इन हाजिरियों के आधार पर 2 लाख 71 हजार 800 रुपये की सरकारी धनराशि के गबन के प्रयास का आरोप सामने आया है।
जांच के बाद ग्राम विकास अधिकारी पवन कुमार मद्धेशिया को निलंबित कर दिया गया, जबकि ग्राम प्रशासक को नोटिस जारी किया गया है।
लेकिन अब सवाल करमहिया को लेकर उठ रहे हैं, जहां कथित तौर पर प्रतिदिन 100 से अधिक मजदूरों की ऑनलाइन हाजिरी दर्ज किए जाने का मामला सामने आया था।
सरकारी योजनाओं का मकसद ग्रामीणों को रोजगार देना और गांवों का विकास करना है, लेकिन जब धरातल पर काम नहीं होने के बावजूद ऑनलाइन हाजिरी दर्ज होने के आरोप सामने आएं, तो व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है।
करमहिया गांव का मामला देश के एक प्रतिष्ठित न्यूज चैनल पर भी प्रमुखता से दिखाया गया था। इसके बावजूद संबंधित ग्राम प्रशासक, सचिव और रोजगार सेवक के खिलाफ कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट नहीं होने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
डीसी मनरेगा के जांच में बढ़हरा चरगहां में चार कार्यस्थलों पर काम नहीं होने के बावजूद 906 ऑनलाइन हाजिरी दर्ज मिलने की बात सामने आई। प्रति हाजिरी 300 रुपये की दर से कुल 2 लाख 71 हजार 800 रुपये की धनराशि के गबन के प्रयास का आरोप है।
इस मामले में ग्राम विकास अधिकारी को निलंबित कर दिया गया, जबकि ग्राम प्रशासक से जवाब मांगा गया है।
ऐसे में सवाल उठता है कि जब एक गांव में अनियमितता मिलने पर कार्रवाई हो सकती है, तो दूसरे गांव में कथित अनियमितता की जांच और कार्रवाई का क्या हुआ?
सूत्रों के हवाले से मनरेगा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी पर मामले को दबाने और लीपापोती करने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में निष्पक्ष जांच और विभागीय अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष सामने आना जरूरी है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या करमहिया मामले में भी जिम्मेदारों की जवाबदेही तय होगी, या फिर यह मामला फाइलों में ही सिमटकर रह जाएगा?
फिलहाल, करमहिया मामले में कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होना बाकी है। जिला प्रशासन और मनरेगा विभाग को चाहिए कि जांच की स्थिति सार्वजनिक करें, ऑनलाइन हाजिरी का सत्यापन कराएं और यदि अनियमितता प्रमाणित होती है, तो नियमानुसार जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करें।
यूपी समाचार प्लस इस मामले में जवाबदेही और पारदर्शिता से जुड़े सवालों को प्रमुखता से उठाता रहेगा।

