बटन दबा नहीं और गड़बड़ी आउट: महराजगंज में आयुष मंत्री दयाशंकर मिश्रा ने जी राम जी अधिनियम को बताया भ्रष्टाचार पर डिजिटल स्ट्राइक

महाराजगंज। उत्तर प्रदेश सरकार के आयुष मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं जनपद प्रभारी मंत्री डॉ. दयाशंकर मिश्रा ‘दयालु’ ने कहा कि जी राम जी अधिनियम भ्रष्टाचार पर सरकार की डिजिटल स्ट्राइक है, जिसमें “बटन दबा नहीं और गड़बड़ी आउट” की व्यवस्था लागू की गई है। उन्होंने यह बात भाजपा कार्यालय पर आयोजित पत्रकार वार्ता में मनरेगा योजना से तुलनात्मक चर्चा करते हुए कही।

डॉ. मिश्रा ने कहा कि जी राम जी अधिनियम को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और भ्रष्टाचार-मुक्त बनाने के लिए तकनीक का व्यापक उपयोग किया गया है। पात्रता निर्धारण, भुगतान और निगरानी की मजबूत डिजिटल व्यवस्था के चलते बिचौलियों की भूमिका लगभग समाप्त हो गई है। उन्होंने कहा कि लाभार्थियों को समयबद्ध और सीधे भुगतान का प्रावधान होने से सरकारी धन के दुरुपयोग पर प्रभावी रोक लगी है।

मंत्री ने कहा कि मनरेगा का उद्देश्य रोजगार उपलब्ध कराना सराहनीय है, लेकिन जमीनी स्तर पर फर्जी जॉब कार्ड, भुगतान में देरी और अपूर्ण कार्यों जैसी समस्याएं सामने आती रही हैं। जी राम जी अधिनियम में किए गए संशोधन के तहत पहले 100 दिन के स्थान पर अब प्रत्येक परिवार को 125 दिन का सुनिश्चित रोजगार दिया जाएगा, जो 25 प्रतिशत की वृद्धि है। इसके साथ ही खेती कार्य के लिए 60 दिन का कार्य आरक्षित किया गया है। इस प्रकार कुल 185 दिन के रोजगार की गारंटी दी गई है।

उन्होंने बताया कि किसानों के हितों की सुरक्षा के लिए फसल बोने और काटने के प्रमुख अवसरों पर अधिकतम 60 दिनों तक कार्य की व्यवस्था की गई है। वहीं मजदूरी भुगतान को लेकर भी बड़ा बदलाव किया गया है। पहले भुगतान की कोई समय-सीमा तय नहीं थी, जबकि अब हर सप्ताह भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा। यदि सात दिन के भीतर भुगतान नहीं होता है तो ब्याज सहित भुगतान की गारंटी दी जाएगी। इसके अलावा यदि किसी ग्रामीण को काम की मांग के 15 दिनों के भीतर रोजगार नहीं मिलता है, तो उसे भत्ता दिया जाएगा। साथ ही जिम्मेदार अधिकारी की समय-सीमा और देयता स्पष्ट रूप से निर्धारित की गई है, जिससे बेरोजगारी भत्ता अब एक स्पष्ट और समयबद्ध अधिकार बन गया है।

डॉ. मिश्रा ने कहा कि अधिनियम में एआई आधारित धोखाधड़ी पहचान प्रणाली, जीपीएस सिस्टम से साप्ताहिक सार्वजनिक डेटा प्रकाशन, साल में दो बार सामाजिक ऑडिट और निरंतर निगरानी की व्यवस्था की गई है। सुधार सुनिश्चित करने के लिए केंद्र और राज्य स्तर पर स्टेयरिंग कमेटियों का गठन भी किया गया है।

प्रभारी मंत्री ने कहा कि जी राम जी अधिनियम न केवल रोजगार और विकास को गति देता है, बल्कि जवाबदेही भी तय करता है। यह योजना कागज और जमीन के बीच की दूरी को कम करती है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य ऐसी योजनाएं बनाना है, जहां लाभार्थी लाइन में नहीं बल्कि सिस्टम में दिखे, और जी राम जी अधिनियम इसी दिशा में एक मजबूत कदम है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में यह अधिनियम सुशासन का मॉडल बनेगा और जनता को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।

भाजपा जिलाध्यक्ष संजय पांडेय ने कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकार की प्राथमिकता पारदर्शी शासन और अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि जी राम जी अधिनियम जनता का भरोसा बढ़ाने वाला कानून है, जिसमें न दलाल है, न देरी। जिलाध्यक्ष ने विश्वास जताया कि यह अधिनियम जनपद ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में सुशासन की पहचान बनेगा।

इस अवसर पर विधायक ज्ञानेंद्र सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष रविकांत पटेल, पूर्व विधायक चौधरी शिवेंद्र सिंह, जिला महामंत्री राजेश उर्फ बबलू यादव तथा जिला मीडिया प्रभारी संजीव शुक्ला उपस्थित रहे।


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