बिना भौतिक सत्यापन 70.40 लाख का भुगतान, ग्राम पंचायत अधिकारी निलंबित
- By UP Samachaar Plus --
- Saturday 31 Oct, 2026
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पनियरा ब्लॉक की आठ ग्राम पंचायतों में वित्तीय अनियमितता का आरोप, जांच के लिए अधिकारी नामित
महराजगंज। शासनादेशों और उच्चाधिकारियों के निर्देशों की अनदेखी करना पनियरा ब्लॉक में तैनात एक ग्राम पंचायत अधिकारी को भारी पड़ गया। विभिन्न ग्राम पंचायतों में बिना भौतिक सत्यापन कराए लाखों रुपये का भुगतान किए जाने और वित्तीय एवं प्रशासनिक अनियमितताओं के प्रथम दृष्टया आरोप में ग्राम पंचायत अधिकारी ओमप्रकाश सिंह को निलंबित कर दिया गया है। जिला पंचायत राज अधिकारी ने तत्काल प्रभाव से निलंबन की कार्रवाई करते हुए उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रस्तावित की है।
जिला पंचायत राज अधिकारी की ओर से जारी आदेश के अनुसार, विकास खंड पनियरा की आठ ग्राम पंचायतों सोहास, ऋषपुर, धनघटी, खजुरिया, तेंदुहिया, सुभितपुर, मोहद्दीनपुर और कनैला में 15वें एवं पंचम वित्त आयोग की धनराशि से कराए गए कार्यों के भुगतान में अनियमितता सामने आई है। आरोप है कि सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) के भौतिक सत्यापन के बिना ही कुल 70 लाख 40 हजार 868 रुपये का भुगतान कर दिया गया।
इसके अलावा शासन की प्राथमिकता वाले कार्यों को दरकिनार कर अन्य कार्य कराए जाने का भी आरोप है। शासनादेशों के तहत ग्राम पंचायतों में डिजिटल लाइब्रेरी, पंचायत सचिवालय और सामुदायिक शौचालय के अवशेष कार्यों को पूरा करने के साथ ही ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन के कार्यों को प्राथमिकता दी जानी थी। आरोप है कि इन निर्देशों का अनुपालन नहीं किया गया।
मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला पंचायत राज अधिकारी ने ग्राम पंचायत अधिकारी को निलंबित कर दिया है। निलंबन अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा। वहीं, प्रकरण की विभागीय जांच के लिए सहायक विकास अधिकारी (पंचायत), परतावल को जांच अधिकारी नामित किया गया है।
साथ ही संबंधित आठों ग्राम पंचायतों में कराए गए कार्यों का स्थलीय सत्यापन कर जांच आख्या उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
जिला पंचायत राज अधिकारी के अनुसार, शासनादेशों के विपरीत कार्य कराने और उच्चाधिकारियों के निर्देशों की अवहेलना के मामले में यह कार्रवाई की गई है। जिलाधिकारी का स्पष्ट निर्देश है कि विकास कार्यों में वित्तीय अनियमितता, सरकारी धन के दुरुपयोग और शासनादेशों की अनदेखी के मामलों में दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए।

