
करौता गांव में जलजमाव से नर्क बनी जिंदगी: सड़क और नाली का फर्क मिटा, जिम्मेदारों की खामोशी पर भी उठे सवाल
- By UP Samachaar Plus --
- Monday 27 Jan, 2025
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मुख्य संपादक - ओंकार नाथ वर्मा
UP Samachar Plus
मिठौरा (महाराजगंज): मिठौरा विकासखंड के ग्राम सभा करौता में जलजमाव की समस्या ने ग्रामीणों की जिंदगी को नरक में बदल दिया है। करौता चौराहे से गांव के अंदर जाने वाले मुख्य मार्ग पर पिछले दो वर्षों से भारी जलजमाव की स्थिति बनी हुई है। आलम यह है कि सड़क और नाली में अब कोई अंतर समझ में नहीं आता। सड़क पर हर तरफ गंदे पानी का ऐसा सैलाब है कि रास्ता पूरी तरह से अदृश्य हो चुका है। गंदे नाले का पानी सड़कों पर जमा होने से बदबू और बीमारियों का प्रकोप भी बढ़ गया है।
गांव के अंदर घुसते ही जलमग्न मुख्य मार्ग
गांव का मुख्य मार्ग, जो करौता चौराहे से शुरू होकर पूरे गांव को जोड़ता था, अब जलजमाव के चलते दुर्गंधयुक्त गंदे पानी की दलदल बन गया है। बारिश के दिनों में यह स्थिति और भी भयानक हो जाती है, जब पानी घरों के अंदर तक घुस जाता है। बरसात न होने के बावजूद सड़कों पर जमा गंदे नाले का पानी ग्रामीणों के लिए बड़ा संकट बना हुआ है।
सड़क पर हर कदम खतरा
ग्रामीणों का कहना है कि जलजमाव के चलते गांव के लोग अपनी जान जोखिम में डालकर गिरते-पड़ते घरों तक पहुंचते हैं। सड़क की हालत इतनी खराब है कि कई बार लोगों को यह समझ ही नहीं आता कि कहां सड़क है और कहां नाली। महिलाएं, बुजुर्ग और छोटे बच्चे अक्सर फिसलकर गिर जाते हैं और गंभीर चोटों का शिकार हो जाते हैं। जहरीले सांपों और मच्छरों की वजह से जानलेवा बीमारियों का खतरा भी लगातार बना हुआ है।
ग्राम प्रधान और प्रशासन ने झाड़ा पल्ला
ग्रामीणों ने समस्या के समाधान के लिए कई बार ग्राम प्रधान से लेकर ब्लॉक स्तर तक शिकायतें कीं, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम प्रधान ने साफ कहा कि यह उनके बस की बात नहीं है। वहीं, जब खंड विकास अधिकारी से इस पर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि उन्हें समस्या की कोई जानकारी नहीं थी। उन्होंने जांच कराने का आश्वासन देकर अपनी जिम्मेदारी खत्म कर ली।
गांव वालों की नरकीय जिंदगी
ग्रामीण जुखना देवी, कौशिल्या, जोखई, इंदु देवी और आशा देवी का कहना है कि यह समस्या उनके लिए दो साल से नरक का रूप ले चुकी है। उनका कहना है कि इस जलजमाव के कारण वे सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों से कट चुके हैं। गंदगी और दुर्गंध के कारण गांव के अंदर और बाहर आना-जाना दूभर हो गया है।
जिम्मेदारों से तीखे सवाल
➡️ क्या दो वर्षों से सड़क-नाली के अंतर को मिटाने वाले जलजमाव पर प्रशासन को कोई जानकारी नहीं थी?
➡️ ग्राम प्रधान और ब्लॉक स्तर के अधिकारियों ने अब तक क्या कार्रवाई की?
➡️ क्या ग्रामीणों को इसी तरह गंदगी और बीमारियों के बीच जीने के लिए छोड़ दिया जाएगा?
➡️ क्या प्रशासन किसी बड़ी घटना का इंतजार कर रहा है?
करौता गांव के लोग वर्षों से इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी इस समस्या को और भी गंभीर बना रही है। यह सवाल उठता है कि आखिर कब सरकार और प्रशासन इस समस्या का समाधान करेंगे? क्या ग्रामीणों को इंसान की तरह जीने का अधिकार मिलेगा, या उनकी जिंदगी हमेशा के लिए गंदगी और जलजमाव की दलदल में फंसी रह जाएगी?
रिपोर्ट - ब्यूरो कार्यालय