जिला महिला अस्पताल में बाहरी पैथोलॉजी का खेल, डॉक्टर पर जांच के लिए बाहर भेजने का आरोप, जांच टीम गठित

महराजगंज। जिला महिला अस्पताल में मरीजों को कथित रूप से बाहरी पैथोलॉजी में जांच कराने के लिए भेजे जाने का मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गई है। मामले में तैनात चिकित्सक डॉ. अरुण कुमार सिंह आरोपों के घेरे में हैं ।शिकायत के बाद प्रशासन ने जांच के आदेश दे दिए हैं।

जानकारी के अनुसार, अस्पताल में इलाज कराने आई एक महिला मरीज पुष्पा के परिजनों ने आरोप लगाया कि डॉक्टर के कक्ष में पहले से मौजूद एक व्यक्ति ने उन्हें बाहर स्थित यश पैथोलॉजी से जांच कराने के लिए कहा। परिजनों का कहना है कि जांच के नाम पर उनसे करीब चार हजार रुपये वसूले गए, जबकि सरकारी अस्पताल में कई जांचें मुफ्त या कम दर पर उपलब्ध होती हैं।

परिजनों का आरोप है कि उक्त व्यक्ति खुद को पैथोलॉजी से जुड़ा बताकर डॉक्टर के कक्ष में ही मौजूद रहता है और मरीजों को उसी के माध्यम से बाहर जांच कराने के लिए भेजा जाता है।

मामले की जानकारी मिलने पर हिंदू जागरण मंच के जिला संयोजक अम्बरीश शर्मा अपने साथियों के साथ जिला महिला अस्पताल पहुंचे और चिकित्सक व कथित दलाल के खिलाफ विरोध जताया इस दौरान डॉ अरुण सिंह के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। मामले की जानकारी होते ही सीएमएस ए.के. द्विवेदी मौके पर पहुंचे और मामले की पूरी जानकारी ली और जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई का भरोसा दिलाया। लेकिन कई दिन बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होने पर हिन्दू जागरण मंच के कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।

मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. ए.के. द्विवेदी ने बताया कि मामला संज्ञान में है और मुख्य चिकित्सा अधिकारी के निर्देश पर तीन सदस्यीय जांच टीम गठित कर दी गई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

वहीं मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने भी पुष्टि करते हुए कहा कि पूरे प्रकरण की जांच के लिए टीम बना दी गई है और रिपोर्ट आने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

इसी बीच यह भी चर्चा है कि आरोपों के केंद्र में रहे चिकित्सक डॉ. अरुण कुमार सिंह घटना के अगले ही दिन लंबी छुट्टी पर चले गए हैं। अस्पताल प्रशासन के अनुसार वह करीब एक महीने के अवकाश पर हैं। ऐसे में जांच प्रक्रिया को लेकर भी सवाल खड़े होने लगे हैं।

गौरतलब है कि यह पहला मौका नहीं है जब जिला महिला अस्पताल या जिला अस्पताल किसी विवाद को लेकर चर्चा में आया हो। इससे पहले भी अस्पतालों में दलालों की सक्रियता और मरीजों को बाहरी जांच केंद्रों पर भेजे जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं। हालांकि अधिकांश मामलों में जांच की बात तो कही जाती है, लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से व्यवस्था पर सवाल उठते रहे हैं।

अब देखना होगा कि गठित जांच टीम कब तक अपनी रिपोर्ट सौंपती है और इस मामले में स्वास्थ्य विभाग क्या कार्रवाई करता है। या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा।


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